टुडे इंडिया ख़बर / स्नेहा
दिल्ली, 6 जनवरी, 2025
हिंदू धर्म में नवरात्रि को सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है।
नवरात्रि का अर्थ है देवी को समर्पित नौ पवित्र रातें। साल में चार बार नवरात्रि आती हैं।
चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि प्रसिद्ध हैं और अन्य दो गुप्त हैं इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है।
इस बार साल 2025 की पहली गुप्त नवरात्रि यानी माघ माह की गुप्त नवरात्रि 30 जनवरी से आरंभ होंगी। इसका समापन 7 फरवरी के दिन होगा।
गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। खास तौर पर तंत्र विद्या में विश्वास रखने वाले लोगों के लिये यह नवरात्र बहुत खास माने जाते है।
इस दौरान जिन 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। वह कुछ इस प्रकार हैं- मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।
साल 2025 में पहली गुप्त नवरात्रि की तिथि,शुभ मुहूर्त ओर महिमा
माघ के गुप्त नवरात्रि सही तिथि
पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 जनवरी 2025 को शाम 6 बजकर 5 मिनट पर होगी। जिसका समापन 30 जनवरी 2025 को शाम 4 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी।
जिसके हिसाब से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार, 30 जनवरी को होगी। वहीं, गुप्त नवरात्रि का समापन शुक्रवार 7 फरवरी 2025 को होगा।
गुप्त नवरात्रि घटस्थापना शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य आचार्य पं. राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि गुप्त नवरात्रि की पूजा की शुरुआत घट स्थापना के साथ की जाती है।
पंचांग के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त की शुरुआत 30 जनवरी सुबह 9 बजकर 25 मिनट से लेकर 10 बजकर 46 मिनट तक है।
ऐसे में भक्तों को घटस्थापना के लिए कुल 1 घंटे 21 मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा घट स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। यहां भक्तों को 43 मिनट का समय मिलेगा।
गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की 10 महाविद्या प्रकट हुईं थी। माघ गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति के 32 अलग-अलग नामों का जाप, दुर्गा सप्तशती , देवी महात्म्य और श्रीमद्-देवी भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने से सभी परेशानियां दूर होती है और जीवन में सुख शांति आती है।
कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना गुप्त तरीके से की जाती है। इस दौरान मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की गुप्त साधना करने का विधान है। गुप्त नवरात्रि पूजा और आराधना आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के उद्देश्य से की जाती है।
दस महाविद्याओ की तांत्रिक साधना
गुप्त नवरात्रि माघ माह शुक्ल पक्ष 30 जनवरी 2025 गुरुवार से शुरू हो रहे है।
गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी देवी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।
गुप्त नवरात्रि पर्व में माँ दुर्गा जी के दस महाविद्या के सरूप में आराधना की जाती है।
समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए माँ की गुप्त रूप से साधना होती है।
वर्ष में 2 गुप्त नवरात्रि आती है जिनमे साधक तंत्रिक पूजन से भी माँ भगवती की आराधना करके प्रशन्न करते है।
ज्योतिषाचार्य पं.नीरज शर्मा ने बताया कि अनेक प्रकार की तांत्रिक साधनाए भी की जाती है।
पति प्राप्ति के लिए मन्त्र-
कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि !
नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:!!
यह मंत्र दुर्गा सप्तशती का संपुटित पाठ किसी योग्य ब्राहमण से करवाए, माता से प्रार्थना करें कि “हे माँ मै आपकी शरण में आ गई, मुझे शीघ्र अति शीघ्र सौभाग्य की प्राप्ति हो और मेरी मनोकामना शीघ्र पूरी हो, माँ भगवती कि कृपा से अवश्य सफलता प्राप्त होगी।
पत्नी प्राप्ति के मंत्र
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्।
तारिणींदुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम.!!
माँ दुर्गा सप्तशती का संपुटित पाठ किसी योग्य ब्राह्मण से करवाए, आपकी मनोकामना शीघ्र पूरी होगी.!!
शत्रु पर विजय ओर शांति प्राप्ति के लिए
सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्.!!
बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिएः
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय..!!

