29 या 30 अप्रैल को परशुराम जयंती पर विवाद…

29 को परशुराम जयंती, 30 को अक्षय तृतीया व्रत

टुडे इंडिया ख़बर / संतोष वशिष्ठ
जयपुर, 14 अप्रैल, 2025

परशुराम जयन्ती को लेकर इस बार फिर विद्वानों के मध्य मत – मतान्तर वाले विचार – विमर्श चल रहे हैं।
विभिन्न मत और भिन्न – भिन्न प्रणालियों द्वारा निर्मित कुछ पञ्चाङ्गों के कारण आमजन के बीच भ्रम उत्पन्न हो रहा है।


इस बार पञ्चाङ्ग भेद के कारण परशुराम जयन्ती 29 अप्रैल मङ्गलवार और 30 अप्रैल बुधवार को है।
धर्मग्रन्थों के अनुसार वैशाख शुक्ल द्वितीया तिथि को मध्याह्न से पहले तृतीया तिथि आ जाए तो उस दिन अक्षय तृतीया, नर – नारायण जयन्ती, परशुराम जयन्ती और हयग्रीव अवतार दिवस – सब सम्पन्न किए जा सकते हैं।
यद्यपि द्वितीया तिथि अपराह्न काल से भी अधिक हो तो परशुराम – जयन्ती अगले दिन मनाई जाती है।
29 अप्रैल मङ्गलवार को द्वितीया तिथि उज्जैन के पञ्चाङ्ग अनुसार रात्रि 8:05 बजे तक है। काशी के विश्व पञ्चाङ्ग अनुसार रात्रि 8:44 बजे तक है। जोधपुर के अक्षांश आधारित निर्मित पञ्चाङ्ग में द्वितीया तिथि सायं 5:32 बजे तक है।
29 अप्रैल मङ्गलवार को पञ्चाङ्ग के अनुसार उज्जैन में सूर्योदय प्रातः 5:58 बजे, जोधपुर में 6:06 बजे और काशी में 5:32 बजे सूर्योदय होगा।
द्वितीया तिथि 29 अप्रैल मङ्गलवार को मध्याह्न के पूर्व तृतीया तिथि नहीं है।
निर्णय सिन्धु के अनुसार – दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी हो या किसी अंश से तुल्य व्यापिनी हो तो पिछली लेना चाहिए, नहीं तो प्रथम ही ग्रहण करना चाहिए।
अतः विद्वतजन निर्णय करें कि किस दिन परशुराम जयन्ती मनाना उचित है?
वैशाखस्य सिते पक्षे तृतीयायां पुनर्वसौ।_
निशाया: प्रथमे यामे रामाख्य: समये हरि:।।
स्वोच्चगै: षड्ग्रहैर्युक्ते मिथुने राहुसंस्थिते।
_*रेणुकायास्तु यो गर्भादवतीर्णो विभु: स्वयम्।।
*अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त*
जयपुर के ज्योतिषाचार्य डॉ. अमित व्यास के वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 29 अप्रैल को शाम 5 बजकर 31 मिनट पर होगी। वहीं, 30 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर तृतीया तिथि समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इसके लिए 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया के दिन पूजा का समय सुबह 05 बजकर 41 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक है।
अक्षय तृतीया, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जिसका अर्थ है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का फल कभी क्षय नहीं होता, बल्कि अक्षय रहता है। इस पावन दिन किसी भी तरह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस पावन दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के पावन दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन पितृ संबंधित कार्य करना भी शुभ रहता है। अक्षय तृतीया का हिंदू धर्म में इसलिए भी बड़ा महत्व है कि इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुरामजी का जन्म हुआ था। साथ ही दस महाविद्याओं में एक नौवीं महाविद्या मातंगी देवी का अवतार भी अक्षय तृतीया पर माना जाता है। भगवान नर नारायण और हयग्रीव भगवान की जयंती भी अक्षय तृतीया को मनाई जाती है।अक्षय तृतीया का पर्व बसंत और ग्रीष्म के संधिकाल का महोत्सव है। इस तिथि में गंगा स्नान, पितरों का तिल व जल से तर्पण और पिंडदान भी पूर्ण विश्वास से किया जाता है जिसका फल भी अक्षय होता है। इस तिथि की गणना युगादि तिथियों में होती है, क्योंकि सतयुग का कल्पभेद से त्रेतायुग का आरंभ इसी तिथि से हुआ।
अक्षय तृतीया का महत्व:
1.शुभ कार्यों की शुरुआत:
यह दिन शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जैसे कि विवाह, गृह प्रवेश, संपत्ति की खरीद, और नए व्यवसाय की शुरुआत. 
2.अबूझ मुहूर्त:
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन बिना किसी शुभ मुहूर्त की चिंता किए कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है. 
3.दान-पुण्य का महत्व:
इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है, ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है. 
4.सोने की खरीददारी:
अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदना भी शुभ माना जाता है, ऐसा माना जाता है कि इस दिन सोने की खरीददारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. 
5.इस दिन पार्वती जी की पूजा करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है. 
6.यक्षराज कुबेर को तृतीया का स्वामी माना गया है, इसलिए इनकी पूजा करने से धन-धान्य, समृद्धि मिलती है. 
7.अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित किया गया है. 
8.अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना गया है, यानी इस दिन किसी भी शुभ काम के लिए शुभ मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं होती. 
9.अक्षय तृतीया के दिन दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. 
10.अक्षय तृतीया के दिन नए व्यापार की शुरुआत और गृह-प्रवेश के लिए शुभ माना गया है. 
11.अक्षय तृतीया के दिन एकाक्षी नारियल, दक्षिणावर्ती शंख, और पारद शिवलिंग खरीदकर घर लाना शुभ माना जाता है. 
12.पौराणिक मान्यताएं:
13.मान्यता है कि इस दिन सतयुग और त्रेता युग का आरंभ हुआ था. 
14.भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म भी इसी दिन हुआ था. 
15 इस दिन गंगा धरती पर अवतरित हुई थी और पांडवों को अक्षय पात्र मिला था. 
16.इस दिन वेदव्यास जी ने गणेश जी के साथ मिलकर महाभारत लिखना आरंभ किया था. 
17 जैन धर्म में महत्व:

  1. जैन धर्म में भी अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है, जैन समुदाय के लोग इस दिन को तीर्थंकर आदिनाथ से जुड़ा हुआ मानते हैं और दान-पुण्य करते हैं.
    19.माता अन्नपूर्णा का जन्मदिन – अक्षय तृतीया के दिन भोजन की देवी ‘माता अन्नपूर्णा’ का जन्म हुआ था।
    20.खजाना – इसी दिन कुबेर को खजाने कि प्राप्ति हुई।
    21कनकधारा स्त्रोत – शंकराचार्य द्वारा अक्षय तृतीया के दिन ही इस महान स्त्रोत की रचना की थी।
    22लक्ष्मी और विष्णु भगवान कि पूजा – इच्छित फल कि प्राप्ति के लिए धन की देवी महालक्ष्मी की भगवान विष्णु के साथ जोड़े से पूजा-अर्चना की जाती है।
    23अक्षय कुमार का जन्म – ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म आखातीज के दिन ही हुआ।
    24धार्मिक यात्रा – इसी दिन बद्रीनारायण के कपाट खुलते हैं। वृंदावन में बांके बिहारी के मंदिर में विग्रह चरणों के दर्शन होते हैं। उत्तराखंड में चार धाम (गंगोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) यात्रा कि शुरुआत। इसी दिन पूरी के जगन्नाथ भगवान के रथों को बनाना शुरु किया जाता है।