मुख्यमंत्री का कर्मचारी संघों के साथ संवाद
टुडे इंडिया ख़बर / स्नेहा
जयपुर, 16 जनवरी, 2025
दिव्यांगों बच्चों को पढ़ने के लिए विशेष शिक्षक उपलब्ध नहीं
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों के सम्बंध में मुख्यमंत्री के समक्ष रखा अपना पक्ष
संवाद में राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने मुख्यमंत्री से कहा कि बजट में वित्तीय भार की बात होती है, वित्तीय मांगे होती है, लेकिन शिक्षा विभाग में इन वित्तीय मांगों से इतर की बात में करना चाहता हूं।

क्योंकि, विभाग में 5 वर्षों से डीपीसी तथा पदौनतियां लम्बित
चल रही है। जहां शिक्षकों का पदोन्नति पाना उनका अधिकार है वह उसी पद से सेवानिवृत हो रहे हैं।
सरकार की ओर से उन्हें वित्तीय लाभ तो मिल जाता है, लेकिन पदोन्नति पद नहीं मिल पाता, जिसकी समाज में अति आवश्यकता है।
हमारी शिक्षा अधिकारियों की शून्यता की वजह से तृतीय श्रेणी से उच्च पदों की डीपीसी नहीं हो रही है।
कुछ कोर्ट केस लगे पड़े हैं जिन पर विभाग के अधिकारी जवाब नहीं दे रहे है। जिससे 5 साल से शिक्षक पदोन्नति की बाट जो रहे हैं।

वही, दिव्यांगों बच्चों को पढ़ने के लिए विशेष शिक्षक उपलब्ध नहीं है, यह एक संवेदनशील विषय है।
जहां सरकार ने इन विशेष बच्चों को पढ़ने के लिए व्याख्याता विशेष शिक्षा के नियम बना दिया। लेकिन, आगे की पढ़ाई के लिए व्याख्याता विशेष शिक्षक नहीं लगाए हैं ।
सामान्य शिक्षकों की भर्ती के लिए तो पद निकले लेकिन इन विशेष बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए।
एक सबसे बड़ा ज्वलंत मुद्दा शिक्षकों के स्थानांतरण तृतीय श्रेणी से लेकर उच्च पदों के स्थानांतरण नहीं हो रहे हैं।
सरकार एक पारदर्शी स्थानांतरण पॉलिसी लावे और तृतीय श्रेणी शिक्षकों को भी इसमें शामिल करते हुए स्थानांतरण किया जाए।
महात्मा गांधी विद्यालय अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक अतिशीघ्र उपलब्ध करायें जाए।
सरकार भर्ती परीक्षा का कैलेंडर जारी करें जिसमें यह तय हो कि हर वर्ष तृतीय श्रेणी श्रेणी ,द्वितीय श्रेणी और व्याख्याता की भर्ती निकली जाए चाहे वह भर्ती सैकड़ो की संख्या में ही हो लेकिन इससे बच्चों को बौध्दिक पलायन नहीं होगा तथा ओवरऐज की समस्या तथा बाहर जो कोचिंग संस्थान के माध्यम से अपना जीवन उपार्जन कर रहे हैं उनको भी रोजगार मिलेगा, ऐसे में सरकार हर वर्ष भर्ती परीक्षा का कैलेंडर जारी करें।
वहीं दूसरी ओर वित्तीय मांगो के तहत शिक्षकों की वेतन में विसंगति में कई समस्या बनी हुई है। उनका फिक्सेशन 11,170 के स्थान पर 12,900 होना था, ऐसे में 2008 के बाद लगे हुए शिक्षकों प्रबोधकों के साथ यह अन्याय हुआ है ।
बिना प्रक्षिशित विधवा, परित्यकता महिला शिक्षकों को 4200/ मानदेय में वृद्धि की जाएं।
ऐसे में सरकार को शिक्षा विभाग पर एक विशेष कार्य योजना बनाकर फोकस किया जाना चाहिए। जिससे सरकार दो वर्ष में एक लाख पदोन्नति कर सकती हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता बढ़कर राजस्थान भारतवर्ष में शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।

