तमाशा राजा गोपीचंद भर्तृहरि का सशक्त मंचन

दो दिवसीय भारतीय लोक नाट्य समारोह का समापन…

टुडे इंडिया ख़बर / संतोष वशिष्ठ
जयपुर, 12 मार्च, 2025

अनुपम रंग थिएटर सोसाइटी व संस्कृति मंत्रालय के सयुंक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय भारतीय लोक नाट्य समारोह के तहत परंपरा नाट्य समिति की ओर से स्व. श्री बंशीधर भट्ट लिखित एवं दिलीप भट्ट निर्देशित तमाशा गोपीचंद भर्तृहरि का मंचन किया गया।


राजा गोपीचंद भर्तृहरि एक ऐतिहासिक आख्यान व लोक कथा है। गोपीचंद, राजा त्रिलोकचन्द तथा रानी मैनावती के इकलौते पुत्र थे। उनकी बहन चंद्रावली थी। वे बंगाल प्रांत के शासक थे। इनका राज्य सुदूर तक फैला हुआ था। उनका बाल्यकाल में ही विवाह हो गया था। उनकी पत्नी का नाम रानी पाटमदे था। एक दिन उनकी माता के पास एक विख्यात ज्योतिषी आए और बताया की उनके पुत्र की अल्पायु है , अतः उन्हें योगी बना दें, जोग दिला दे ताकि वे अपनी आयु को बढ़ा सके। इस प्रकार के वचन सुनकर माता मैनावती को बड़ा आघात हुआ। वह उदास रहने लगी, खाना पीना सब छोड़ दिया हमेंशा अपने बेटे के जोग की चिंता में गुमसुम और बैचेन रहने लगी। माता की इस प्रकार की अवस्था देखकर एक दिन राजा गोपीचंद ने अपनी माता से चिंता का कारण पूछा ,माता ने उनसे वचन लिया। उन्होंने वचन के अनुकूल चलने का प्रण किया।
नाटक में जीवन के उपदेश, गुरु दीक्षा, त्याग, बलिदान और भिक्षा के साथ मन की शांति तथा माता की आज्ञा मानने की कथा को सशक्त अभिनय व संवाद के साथ शास्त्रीय संगीत की रागों में पिरोकर कलाकारों ने पेश किया, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
नाटक में दिलीप भट्ट, सचिन भट्ट, हर्ष भट्ट आदि ने अपने दमदार शास्त्रीय संगीत की रागों से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। प्रकाश व्यवस्था शहज़ोर अली की थी। सारंगी पर मनोहर महावर, तबला शैलेन्द्र शर्मा हारमोनियम पर शेर खान ने संगत की।